Tuesday, July 14, 2009
Sunday, May 10, 2009
PARASITOIDIC WASP !!
This is full grown larva of a tinny wasp called locally as ANGIRA say Aenasius spps. that was feeding upon the mealybug from inside
.This has bee scissored out from inside the body of a mealybug by the farmers of Nidana with the help of their nails in the cotton field. See the mummified body of mealybug which had turned dark brown because of feeding by this larva from the inside.
.This has bee scissored out from inside the body of a mealybug by the farmers of Nidana with the help of their nails in the cotton field. See the mummified body of mealybug which had turned dark brown because of feeding by this larva from the inside.
Monday, March 16, 2009
Wednesday, February 25, 2009
अंगीरा-किसान का स्वभाविक मित्र
परजीवी,परभक्षी व रोगाणुओं के अलावा मिलीबग के दुश्मन परजीव्याभ भी होते हैं। परजीव्याभ अपने आश्रयदाता से छोटे होते हैं तथा अपना जीवन चक्र पुरा करने के लिए एक ही आश्रयदाता की भेंट लेते हैं। जिला जींद में निडाना के किसानों ने ऐसी ही एक परजीव्याभ संभीरका राजेश पुत्र महाबीर के खेत में कपास के पौधों पर मिलीबग के पेट में पलती हुई पकड़ी है। इसका नाम उन्होंने अंगीरा रखा है। अंगीरा का प्रौढ़ तो स्वतन्त्र जीवन जीता है पर इसकी बाल्यवस्था मिलीबग के पेट में पुरी होती है। आपको मालूम हो कि यह सम्भीरका मिलीबग के पेट में अपने अंडे से लेकर प्रौढ़ होने तक तक़रीबन पंद्रह दिन का समय लेती है। इस प्रक्रिया में मिलीबग को मिलती है -मौत। मिलीबग को परजीव्याभीत करने वाले इस भीरडनुमा जन्नौर को वैज्ञानिक अपनी भाषा में इसे एनासिय्स कहते है।
जच्चा बच्चा का स्वास्थ्य
Thursday, February 5, 2009
सरसों की फसल में अल के शिकारी
एफिडियस नामक सम्भीरका द्वारा परजीव्याभित चेपा :रंग बदला हुआ,शरीर फूला एवं पथराया हुआ।
फफुन्दीय रोगाणु द्वारा संक्रमित मरनासन चेपा 
चेपे की पीठ पर सिरफ़डो का अंडा 
लेडीबीटल का प्रौढ़ 
सरसों की फसल में अल/चेपा के आक्रमण के साथ ही लेडिबीटल्ज/ मनयारियों ने अपनी वंश वृद्धि के लिए अंडे देने शुरू कर दिए ताकि उनके नवजातों को चेपा के रूप में नर्म मांसाहार मिल जाए। 
सिरफ़डो मक्खी कहाँ पीछे रहने वाली थी। उसने भी चेपे की कालोनियों में अंडे दिए।इन अण्डों में से इसका शिशु निकल कर चेपा खाते हुए।
सिरफ़डो मक्खी कहाँ पीछे रहने वाली थी। उसने भी चेपे की कालोनियों में अंडे दिए।इन अण्डों में से इसका शिशु निकल कर चेपा खाते हुए।
Monday, February 2, 2009
Subscribe to:
Posts (Atom)
