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Wednesday, February 25, 2009

जच्चा बच्चा का स्वास्थ्य

जिला जीन्द में सरसों की फसल पर इस साल भी चेपे का आक्रमण हुआ है। लेकिन यह हमला हल्का एवम देर से हुआ तथा सौभाग्य से लेडिबिटल व सिरफ़डो मक्खी जैसे कीटभाजी कीट समय पर आ गये जिस कारण हमारी फसल पर इसके प्रकोप का नुकशान नहीं हुआ। चेपा अपनी वंश वृद्धि बिना नर मादा मिलन के भी कर लेता है। इसकी प्रसव वेदना की तो हमें जानकारी नहीं। पर इन्सान की तरह इसको ना तो किसी शिशु प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रम की आवश्कयता पड़ती है और ना ही किसी सिजेरियन आपरेशन की जरूरत पड़ती है। काश !

Thursday, February 5, 2009

सरसों की फसल में अल के शिकारी


एफिडियस नामक सम्भीरका द्वारा परजीव्याभित चेपा :रंग बदला हुआ,शरीर फूला एवं पथराया हुआ।











फफुन्दीय रोगाणु द्वारा संक्रमित मरनासन चेपा







चेपे की पीठ पर सिरफ़डो का अंडा






लेडीबीटल का प्रौढ़






सरसों की फसल में अल/चेपा के आक्रमण के साथ ही लेडिबीटल्ज/ मनयारियों ने अपनी वंश वृद्धि के लिए अंडे देने शुरू कर दिए ताकि उनके नवजातों को चेपा के रूप में नर्म मांसाहार मिल जाए।
सिरफ़डो मक्खी कहाँ पीछे रहने वाली थी। उसने भी चेपे की कालोनियों में अंडे दिए।इन अण्डों में से इसका शिशु निकल कर चेपा खाते हुए।


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